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मेरे प्रिय लेखक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा - के एल जमड़ा | My Favorite Writer Prof. Shailendra Kumar Sharma - K L Jamda

मेरे प्रिय लेखक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा 

– कारूलाल जमड़ा


Prof. Shailendra Kumar Sharma
प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा


मेरे प्रिय लेखक और साहित्यकार डॉ.शैलेन्द्र कुमार शर्मा - डॉ के एल जमड़ा 

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में कुलानुशासक और हिन्दी विभागाध्यक्ष आदरणीय डॉ.शैलेन्द्र कुमार शर्मा उस शख़्सियत का नाम है जो शिक्षा, साहित्य और संस्कृति की त्रिवेणी में गहराई तक पैठ बना चुके राजनीतिक पंक के मध्य से साहित्य-सृजन की पवित्र गंगा के अजस्र प्रवाह को लेकर आगे बढ़ते हैं और उसकी पवित्रता से अपने सम्पर्क में आने वाले हर अनुरागी को नित लाभान्वित करते जाते हैं।

यह आपके भीतर गहराई तक बसी हुई संवेदनाओं या यूँ कहे कि भावुकता का शाश्वत प्रवाह ही है कि साहित्य गंगा के निर्मल औदार्य को ग्रहण कर आपने उसे संपूर्ण भारत ही नहीं अपितु विश्व के अनेक देशों में प्रसाद की तरह वितरित किया है। मेरे विचार में डॉ.शैलेन्द्र कुमार शर्मा अपने देश और देश के बाहर भी उज्ययिनी और विक्रम विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक राजदूत कहे जा सकते हैं।



हिंदी भीली अध्येता कोश – प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा


हिंदी कथा साहित्य – संपादक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा


मालव सुत पं सूर्यनारायण व्यास
– संपादक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा


हिन्दी भाषा और साहित्य से संबंधित विश्वविद्यालय स्तर की कई किताबों का लेखन और संपादन, देश-विदेश की महत्वपूर्ण और श्रेष्ठतम संस्थाओं से सम्बद्धता, देश-विदेशों में विभिन्न विषयों पर सैकड़ों व्याख्यान और परिसंवाद, पचहत्तर से अधिक विद्यार्थियों को शोध निर्देशन, कई ख्यात सम्मानों और पुरस्कारों से विभूषित डॉ.शैलेन्द्रकुमार शर्मा का मालव माटी से होना हम सभी के लिए आनंद और गौरव की बात है।


आचार्य नित्यानंद शास्त्री और रामकथा कल्पलता संपादक – प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा


यह मेरे प्रति आत्मीय अनुराग ही था कि एक संक्षिप्त सी भेंट और छोटी सी विनती पर ही आपने मेरे काव्य संग्रहों - वह बजाती ढोल (2015), और भाग -2 सफर संघर्षों का (2017) के विमोचन पर अपना गौरवमयी आतिथ्य प्रदान किया तथा अपने ओजस्वी और महत्वपूर्ण वक्तव्य से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। आपका प्रिय होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।


प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य
– संपा. प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी भाषा और नैतिक मूल्य
– संपा. प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा


उनकी मुख्य कृतियाँ हैं  : शब्दशक्ति संबंधी भारतीय और पाश्चात्य अवधारणा तथा हिन्दी काव्यशास्त्र, देवनागरी विमर्श, मालवा का लोकनाट्य माच और अन्य विधाएं, हिंदी भीली अध्येता कोश, महात्मा गांधी : विचार और नवाचार, सिंहस्थ विमर्श, हिन्दी भाषा संरचना, मालवी भाषा और साहित्य, अवन्ती क्षेत्र और सिंहस्थ महापर्व, प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य, हिंदी कथा साहित्य, मालव सुत पं सूर्यनारायण व्यास, आचार्य नित्यानंद शास्त्री और रामकथा कल्पलता, हरियाले आंचल का हरकारा : हरीश निगम, हिन्दी नाटक, निबंध तथा स्फुट गद्य विधाएँ एवं मालवी भाषा साहित्य, मालव मनोहर, हिंदी भाषा और नैतिक मूल्य, हरीश प्रधान- व्यक्ति और काव्य, स्त्री विमर्श : परंपरा और नवीन आयाम, ज्ञानसेतु आदि प्रमुख ग्रंथों सहित निबंध, आलोचना, भाषाशास्त्र, मालवी बोली आदि विषयों पर लगभग 35 से अधिक पुस्तकें। आपने “केन्द्रीय हिन्दी संस्थान” आगरा का “हिंदी-भीली अध्येता कोश” तैयार करने में संपादक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।


स्त्री विमर्श परंपरा और नवीन आयाम
– संपा. प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा

हरियाली आंचल का हरकारा हरीश निगम
– संपादक डॉ शैलेंद्र कुमार शर्मा

उन्हें अर्पित किए गए महत्वपूर्ण एवं ख्यात सम्मान/पुरस्कार हैं :  आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सम्मान”, “राष्ट्रीय कबीर सम्मान”, “हिंदी सेवी सम्मान”, “भाषा- भूषण सम्मान”, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, “अक्षर आदित्य सम्मान”, “साहित्य सिंधु सम्मान”, “विश्व हिन्दी सेवा सम्मान” आदि।



मालवा का लोकनाट्य माच और अन्य विधाएं
संपादक प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा

मालवी भाषा और साहित्य प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा


आदरणीय डॉ.शैलेन्द्रकुमार शर्मा जी का आत्मीय अभिनंदन और स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की असीम मंगलकामनाएँ अर्पित करता हूँ।


देवनागरी विमर्श – शैलेंद्र कुमार शर्मा

शब्द शक्ति संबंधी भारतीय और पाश्चात्य अवधारणा तथा हिंदी काव्यशास्त्र
डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा



– कारूलाल जमड़ा

कवि, अनुवादक और संस्कृतिकर्मी

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