20130303

हरिवंशराय बच्चन की चर्चित कविता 'अग्निपथ' हर बार नया अर्थ देती है


अग्निपथ

अपने ढंग के अलबेले कवि हरिवंशराय बच्चन की चर्चित कविता 'अग्निपथ' हर बार नया अर्थ देती है। 2007-2008 में उनके सहित सात महान रचनाकारों का शताब्दी वर्ष मनाने का सुअवसर मिला था। उसी मौके पर चित्रकार श्री अक्षय आमेरिया द्वारा आकल्पित पोस्टर का विमोचन कवि - आलोचक अशोक वाजपेयी एवं तत्कालीन कुलपति प्रो.रामराजेश मिश्र  ने किया था। साथ में (दाएँ से ) संयोजक प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, लोक कलाकार कृष्णा वर्मा , पूर्व कुलसचिव डॉ. एम. के. राय, डॉ. राकेश ढंड । पोस्टर के साथ कविता का आनंद लीजिये... 


वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छांह भी,
मांग मत, मांग मत, मांग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ

तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ








5 टिप्‍पणियां:

  1. दोस्त, बहौत बधाई
    - पंकज त्रिवेदी
    एडिटर नव्या
    www.nawya.in

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    1. धन्यवाद। अमिट प्रेरणा जगाती है यह कविता।

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  2. really awesome poem it motivates me to do new things and achieve my visions....

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    1. बिलकुल सही कहा। अमिट प्रेरणा से युक्त है यह कविता।

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  3. namastE, Do you know which publishing house published the book Shree Guru Mahimaa by AchArya Ramamurti Tripathi? DhanyavAd!!

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