20130313

साहित्य अकादमी से सम्मानित चंद्रकांत देवताले की कविता 'माँ पर नहीं लिख सकता कविता '


वरिष्ठ कवि श्री चंद्रकांत देवताले को उनके कविता संग्रह 'पत्थर फेंक रहा हूँ पर साहित्य अकादमीदिल्ली के वर्ष 2012 के साहित्य अकादमी पुरस्कार अर्पित होने की खबर से हार्दिक प्रसन्नता हुई। । साठोत्तरी हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर देवताले जी की प्रमुख कृतियाँ हैं- हड्डियों में छिपा ज्वरदीवारों पर खून सेलकड़बग्घा हँस रहा हैरोशनी के मैदान की तरफ़भूखंड तप रहा हैहर चीज़ आग में बताई गई थीपत्थर की बैंचइतनी पत्थर रोशनीउजाड़ में संग्रहालय आदि। उनकी प्रसिद्ध कविता 'माँ पर नहीं लिख सकता कविता ' मुझे विशेष आनंद देती है।  देखिये 
माँ पर नहीं लिख सकता कविता 
माँ के लिए संभव नहीं होगी मुझसे कविता
अमर चिऊंटियों का एक दस्ता
मेरे मस्तिष्क में रेंगता रहता है
माँ वहां हर रोज चुटकी-दो-चुटकी आटा डाल देती है
मैं जब भी सोचना शुरू करता हूं 
यह किस तरह होता होगा
घट्टी पीसने की आवाज मुझे घेरने लगती है
और मैं बैठे-बैठे दूसरी दुनिया में ऊंघने लगता हूं
जब कोई भी माँ छिलके उतार कर
चनेमूंगफली या मटर के दाने नन्ही हथेलियों पर रख देती है
तब मेरे हाथ अपनी जगह पर थरथराने लगते हैं
माँ ने हर चीज के छिलके उतारे मेरे लिए
देहआत्माआग और पानी तक के छिलके उतारे
और मुझे कभी भूखा नहीं सोने दिया
मैंने धरती पर कविता लिखी है
चंद्रमा को गिटार में बदला है
समुद्र को शेर की तरह आकाश के पिंजरे में खड़ा कर दिया
सूरज पर कभी भी कविता लिख दूंगा
माँ पर नहीं लिख सकता कविता!


 प्रो. चंद्रकांत देवताले के साथ प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा


                                               डा. शैलेन्द्रकुमार शर्मा
                                               आचार्य एवं कुलानुशासक
                                               विक्रम विश्वविद्यालय
                                                                                              उज्जैन (म.प्र.) 456 010

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