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20200903

महात्मा गांधी : विचार और नवाचार - पुस्तक समीक्षा

महात्मा गांधी : विचार और नवाचार - एक दस्तावेजी ग्रन्थ 

समीक्षक - डाॅ देवेन्द्र जोशी

वक्त गुजर जाता है बातें याद रह जाती हैं। साहित्य को समाज का दर्पण इसलिए कहा जाता है कि समय गुजरने के बाद भी वह तत्कालीन समय की स्मृतियों की सुरभि से समाज को महकाता रहता है। अपनी रचनात्मक सुरभि से समाज को इसी तरह का महकाने का एक उल्लेखनीय कार्य विक्रम विश्वविद्यालय ने  हाल ही में कर दिखाया है। वह है प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा के संपादन में महात्मा गांधी : विचार और नवाचार ग्रंथ का प्रकाशन। 




यह पुस्तक महात्मा गांधी के 150 वें  जयंती वर्ष में गांधी जी पर एकाग्र विचारों के साथ विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विविध नवाचार और गतिविधियों पर केंद्रित है, जो विगत दिनों प्रकाशित हो कर आई है। गांधी डेढ़ शती वर्ष की उपलब्धियों को बहुत सुंदर रूप से इसमें संजोया गया है। इसे एक दस्तावेजी ग्रंथ की संज्ञा देना अधिक उपयुक्त होगा। इस ग्रंथ  में गांधी जी के विचारों को शोध आलेखों और राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों के निष्कर्षों के साथ जिस तरह सुसंपादित किया गया है, वह अपने आप में गांधी पर केन्द्रित 21 वीं सदी का एक ऐसा शब्द गुच्छ बन पडा है, जो रचनात्मक सुरभि से समाज को दिग्दिगंत तक महकाता रहेगा। इसके लिए समूचे आयोजन के परिकल्पनाकार कुलपति  प्रो. बालकृष्ण शर्मा और उस संकल्पना को साकार करने वाले ग्रंथ संपादक, कुलानुशासक एवं गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा बधाई और साधुवाद के पात्र हैं।  प्रो शर्मा ने बडे मनोयोग से गांधी डेढ शती मनाने की न सिर्फ बृहद् रूपरेखा तैयार की, अपितु  उसे कारगर ढंग से क्रियान्वित भी किया। यही नहीं,  पूरे वर्ष तक चले इस रचनात्मक महायज्ञ का इस महाग्रंथ रूपी पूर्णाहुति के साथ उतना ही गरिमामय  समाहार भी किया।    

इस ग्रंथ का सबसे समृद्ध पक्ष प्रो बालकृष्ण शर्मा, डाॅ  मुक्ता, डाॅ राकेश पाण्डेय और प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा के महत्त्वपूर्ण आलेख हैं। ये आलेख समूची आयोजना और इस ग्रंथ की पीठिका की तरह हैं, जिस पर यह भव्य इमारत खडी की गई है। 

गांधी विचार के विविध पक्षों को लेकर जीवन सिंह ठाकुर, डाॅ मंजु तिवारी, डाॅ  पूरन सहगल, डाॅ  विनय कुमार पाठक, डाॅ पुष्पेन्द्र दुबे, डाॅ जगदीश चन्द्र शर्मा, डाॅ  जवाहर कर्नावट, डाॅ  प्रतिष्ठा शर्मा, डाॅ दिग्विजय शर्मा आदि ने अपने आलेखों से इस दस्तावेजी पुस्तक को यादगार बनाने में कोई कसर बाकी नहीं  छोड़ी है। 

उल्लेखनीय शोधपरक आलेखों के रूप में अर्चना त्रिवेदी एवं डाॅ  पुष्पेन्द्र  दुबे, ॠषिराज उपाध्याय, डाॅ  श्वेता पण्ड्या आदि के आलेखों की चर्चा की जा सकती है। विक्रम विश्वविद्यालय की गांधी 150 वीं जन्म-शती समारोह समिति के तत्त्वावधान में हिन्दी अध्ययनशाला, गांधी अध्ययन केंद्र सहित विभिन्न विभागों में आयोजित  राष्ट्रीय संगोष्ठियों, व्याख्यानों, परिसंवादों की खासियत यह रही कि इन्हें विश्वविद्यालय के अकादमिक परिसर तक सीमित न रखते हुए नगर और देश - प्रदेश के चिन्तनशील सर्जक, कवि और साहित्यकारों से भी जोडा गया। इसकी बानगी गांधी जीवन दर्शन पर बहुभाषी कवि गोष्ठी और भजनांजलि के रूप में देखने को मिली। इस सरस सुमधुर आयोजन में  सुनाई गई रचनाओं में से डाॅ देवेन्द्र जोशी की याद आएंगे गांधी, रफीक नागौरी की बापू और शिशिर उपाध्याय की गांधी बाबा पाछा आओ रचनाएँ इस ग्रंथ में शामिल की गई  हैं। 

इसी क्रम में वर्ष भर चली गांधी चिंतन से जुड़े  नवाचारों और रचनात्मक गतिविधियों के वृत्तांत को बहुरंगी चित्रों के साथ पुस्तक में सहेजा गया है। इस समूची आयोजना के बारे में जानकारी देते हुए संपादक प्रो शैलेन्द्र कुमार  शर्मा ने अपने संपादकीय में लिखा है कि समूचे आयोजन में  कला, साहित्य एवं भाषाओं, समाज विज्ञानों एवं विविध भौतिक एवं जीव विज्ञानों के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई। इस दिशा में राष्ट्रीय  सेवा योजना और राष्ट्रीय कैडेट कोर के युवाओं की गतिशील हिस्सेदारी ने भी उल्लेखनीय योगदान  दिया। पूरे वर्ष के दौरान गांधी चिन्तन के विविध पहलुओं से जुडी संगोष्ठियों, व्याख्यानों कार्यशालाओं, साहित्य  एवं  संस्कृति कर्म, सामुदायिक एवं युवा गतिविधियों और बहुविध नवाचारों की अविराम शृंखला जारी रही। ..... दुनिया के किसी विश्वविद्यालय या संस्था ने इतनी बडी संख्या में लोगों की सक्रिय भागीदारी  के साथ विविधायामी और नवाचारी गतिविधियां  संयोजित नहीं की हैं, जितनी विक्रम विश्वविद्यालय में  संभव हुई हैं। ..... गांधी जी के 150 वें जयंती वर्ष में विक्रम विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययन  केन्द्र  के ग्रंथालय और वाचनालय को आम जनता के लिए के लिए खोल दिया गया है। जहां संपूर्ण गांधी वाङ्मय, संदर्भ सामग्री और पत्र - पत्रिकाएँ बडी संख्या में उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग के सौजन्य से राजनीति विज्ञान अध्ययनशाला में गांधी  चेयर की स्थापना की गई  है। .... विभिन्न भाषाओं के कवियों की गांधी जी के प्रति भावांजलियों और महात्मा गांधी के युगांतरकारी कार्यों और प्रभाव को प्रत्यक्ष करते दुर्लभ फोटोग्राफ्स भी इस ग्रंथ  में  संजोये गये हैं।

इस बहुरंगी पुस्तक का चित्ताकर्षक आवरण अक्षय आमेरिया ने तैयार किया है तथा प्रकाशन यूजीसी की 12 वीं पंचवर्षीय योजना के अनुदान से किया गया है। सरकारी अनुदान से हुए अनेक कार्यों को देखा गया है, लेकिन जितने मनोयोग से विक्रम विश्वविद्यालय ने इस पुस्तकीय दायित्व को अंजाम  दिया है, वह अपने आप में अद्वितीय है। कुल मिलाकर  गांधी डेढ सौ वे जयंती वर्ष में विक्रम विश्वविद्यालय ने गांधी स्मरण के जो कीर्तिमान कायम किए हैं, वे देश दुनिया के अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के लिए किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। 


डाॅ देवेन्द्र  जोशी 

85, महेशनगर 

अंकपात मार्ग 

उज्जैन 

(मध्यप्रदेश) - 456006


पुस्तक का नाम : गांधी विचार और नवाचार 

संपादक :  प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा 

प्रकाशक : विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन

प्रकाशन वर्ष : 2020

14 टिप्‍पणियां:

  1. हार्दिक बधाई सर।

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  2. उत्तम कार्य...

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. उल्लेखनीय और प्रशंसनीय!

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  5. गांधीजी पर रचनात्मक गतिविधियों, विविध नवाचारों, चिंतन पर विस्तृत वृत्तांत पुस्तक में सहेजने पर बहुत-बहुत हार्दिक बधाई सर जी🙏💐

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  6. समग्र दृष्टि

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  7. सर, बढ़िया। उल्लेखनीय👍👍

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