अखिल भारतीय कालिदास समारोह : कौशिकी चक्रबर्ती की सम्मोहनकारी गायकी से सजी सांझ और संवाद - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा
अखिल भारतीय कालिदास समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत छठी शाम को प्रख्यात शास्त्रीय गायिका कौशिकी चक्रवर्ती ने सम्मोहनकारी गायकी से अपना रंग जमाया। प्रस्तुति के बाद उनसे भेंट का सुयोग बना। वे शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में आज की अग्रणी गायिका हैं।
उन्होंने अपने गायन की शुरुआत खनकदार शास्त्रीय गायन से की। आरोह-अवरोह पर उनकी गहरी पकड़ ने श्रोताओं को दाद देने के लिए विवश कर दिया था। कौशिकी जी की साँसों की लय की तरह ही सहज है उनका संगीत, जिसने आखिर तक लोगों को बांधे रखा। उन्होंने द्रुत लय में गोस्वामी तुलसीदास के भजन जय जय जग जननी देवी मां से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भजन शिव शंभू दर्शन दीजे ने भी गहरा असर छोड़ा। मूल रूप से आशा भोंसले द्वारा गाए गई गज़ल सलोना सा सजन है और मैं हूं को कौशिकी जी ने अपनी अनूठी शैली में गाया। कालिदास समारोह की यह एक यादगार शाम रही।
उनके गायन की बानगी के लिए लिंक पर जाएँ :
1. सलोना सा सजन है और मैं हूं :
2. जय जय जगजननी देवी :
3. शिव शंभू दर्शन दीजे
4. कौशिकी चक्रवर्ती शास्त्रीय बंदिश
5. रतिया कीनी भोर बतिया बनाए
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