प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा आचार्य विनोबा भावे राष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मान 2016 से विभूषित
पुरी (ओड़ीसा) में आयोजित अधिवेशन में हुआ सम्मान
विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक और समालोचक प्रो॰ शैलेन्द्रकुमार शर्मा को पुरी (ओड़ीसा) में राष्ट्रीय आचार्य विनोबा भावे नागरी लिपि सम्मान 2016 से विभूषित किया गया। उन्हें यह सम्मान देवनागरी लिपि के संप्रसार एवं संवर्धन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली द्वारा पुरी (ओड़ीसा) में सम्पन्न नागरी लिपि परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में अर्पित किया गया। उन्हें यह सम्मान आंध्र प्रदेश भूदान बोर्ड, हैदराबाद के अध्यक्ष श्री सी वी चारी, उत्कल राष्ट्रभाषा प्रचार सभा, कटक की मंत्री श्रीमती विनीता पाठक, नागरी लिपि परिषद के मंत्री डॉ परमानंद पांचाल एवं साहित्यकार राधाकान्त मिश्र, भुवनेश्वर द्वारा अर्पित किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें प्रशस्ति पत्र, सम्मान राशि, प्रतीक-चिह्न और अंगवस्त्र अर्पित किए गए। इस अधिवेशन के तकनीकी सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में प्रो॰ शर्मा ने ‘विश्व पटल पर देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता और सूचना प्रौद्योगिकी' पर केन्द्रित अपना विशिष्ट व्याख्यान दिया।
प्रो. शर्मा को राष्ट्रीय आचार्य विनोबा भावे नागरी लिपि सम्मान से अंलकृत किए जाने पर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो. शीलसिंधु पांडे, पूर्व कुलपति प्रो. रामराजेश मिश्र, प्रो. टी.आर. थापक, कुलसचिव डा. एस सी आर्य, म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष प्रो. हरीश प्रधान, इतिहासविद् डा. श्यामसुंदर निगम, डा. भगवतीलाल राजपुरोहित, डा. शिव चौरसिया, डा. राकेश ढण्ड, प्रो प्रेमलता चुटैल, प्रो गीता नायक, डा. जगदीशचंद्र शर्मा, डॉ प्रभुलाल चौधरी, डा. देवेन्द्र जोशी, डॉ अनिल जूनवाल, श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव‘नवनीत’, श्रीराम दवे, श्री राधेश्याम पाठक‘उत्तम’, डा. राजेश रावल ‘सुशील’, संदीप सृजन, संतोष सुपेकर, डा. प्रभाकर शर्मा,राजेन्द्र देवधरे ‘दर्पण’, राजेन्द्र नागर ‘निरंतर’,अक्षय अमेरिया, डा. मुकेश व्यास, श्री श्याम निर्मल आदि सहित अनेक शिक्षाविद्,संस्कृतिकर्मी और साहित्यकारों ने हर्ष व्यक्त कर उन्हें बधाई दी। यह जानकारी राजभाषा संघर्ष समिति, उज्जैन के संयोजक डॉ अनिल जूनवाल ने दी।
समीक्षा एवं अनुसंधानपरक लेखन में पिछले तीन दशकों से निरंतर सक्रिय डॉ शर्मा ने भारत की लिपिविहीन लोक और जनजातीय भाषाओं के लिए देवनागरी लिपि के संप्रसार के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देवनागरी के अनुप्रयोगों के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने देवनागरी विमर्श, शब्दशक्ति सम्बन्धी भारतीय और पाश्चात्य अवधारणा तथा हिन्दी काव्यशास्त्र, मालवा का लोकनाट्य माच और अन्य विधाएं, हिन्दी भाषा संरचना,मालवी भाषा और साहित्य, अवन्ती क्षेत्र और सिंहस्थ महापर्व आदि सहित तीस से अधिक ग्रन्थों का लेखन एवं सम्पादन किया है। शोध पत्रिकाओं और ग्रन्थों में आपके 250 से अधिक शोध एवं समीक्षा निबंधों एवं पत्र-पत्रिकाओं में 750 कला एवं रंगकर्म समीक्षाओं का प्रकाशन हुआ है। आपने उज्जैन में मालव नागरी लिपि अनुसंधान केन्द्र की स्थापना के साथ ही देवनागरी से जुड़ी अनेक राष्ट्रीय स्तर की अनेक संगोष्ठी और कार्यशालाओं का समन्वय किया है।

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